
2025 में खाद की कीमतों में बदलाव: किसानों के लिए बड़ी अपडेट — जाने कौन सी खाद महंगी और कौन सस्ती हुई
भारत में खेती का बड़ा हिस्सा रासायनिक और जैविक खादों पर निर्भर है। हर साल खरीफ और रबी सीजन के पहले सरकार खादों की उपलब्धता, कीमत और सब्सिडी को लेकर नई जानकारी जारी करती है। 2025 में खादों की कीमतों और उपलब्धता में कुछ बदलाव हुए हैं, जो किसानों के लिए जानना जरूरी है।
DAP खाद की कीमत में बदलाव
DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) किसानों की सबसे ज़्यादा उपयोग होने वाली खादों में से एक है।
इस साल सरकार ने इसके दामों में हल्की बढ़ोतरी की है, हालांकि सब्सिडी जारी रहने से कीमत पहले जैसी स्थिर है।
- पिछला मूल्य: लगभग ₹1,350–₹1,400 प्रति बोरी
- वर्तमान मूल्य: ₹1,400–₹1,500 (क्षेत्र अनुसार अंतर)
सरकार ने बताया कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद किसानों पर बोझ कम रखने के लिए सब्सिडी जारी रहेगी।
Urea (यूरिया) की कीमत स्थिर, पर सप्लाई पर नजर
यूरिया भारत में सबसे ज़्यादा उपयोग की जाने वाली खाद है।
इस साल यूरिया के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
मौजूदा दाम: ₹266 प्रति 45-kg बैग
लेकिन कुछ राज्यों में मांग बढ़ने के कारण अस्थायी कमी की खबरें आई हैं, खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में, जहाँ किसान रबी सीजन के लिए स्टॉक करने लगे हैं।
सरकार ने कहा है कि सप्लाई बढ़ाई जा रही है और जल्द स्थिति सामान्य होगी।
NPK और SSP खाद की मांग तेजी से बढ़ी
चूंकि किसान संतुलित पोषण की ओर ध्यान दे रहे हैं, इसलिए NPK और SSP खाद की खपत बढ़ रही है।
| खाद प्रकार | पिछले वर्ष की कीमत | वर्तमान वर्ष कीमत | बदलाव |
|---|---|---|---|
| SSP | ₹350–₹450 | ₹400–₹500 | थोड़ी बढ़ी |
| NPK | ₹1,200–₹1,350 | ₹1,300–₹1,450 | मांग के कारण बढ़त |
विशेषज्ञों के अनुसार, NPK खाद का उपयोग मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, इसलिए इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट की डिमांड में उछाल
किसानों में अब जैविक खेती को लेकर रुचि बढ़ रही है।
वर्मी कम्पोस्ट की कीमत ₹6 से ₹10/kg के बीच पहुंच गई है।
गौ आधारित जैविक खाद (जीवामृत, घनजीवामृत) की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है।
सरकार किसानों को ऑर्गेनिक खेती अपनाने पर 40–60% तक सब्सिडी देने पर विचार कर रही है।
सरकार का बयान: किसानों को घबराने की जरूरत नहीं
कृषि मंत्रालय ने कहा है कि:
खाद का पर्याप्त भंडार देश में उपलब्ध है
किसानों को कालाबाजारी या ज्यादा दाम देने की जरूरत नहीं
जिलों में निगरानी टीम तैनात की गई है
विशेषज्ञों की राय: संतुलित खाद देना जरूरी
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अधिक खाद डालने से:
मिट्टी की उर्वरता घटती है
लागत बढ़ जाती है
पर्यावरण को नुकसान होता है
इसलिए किसान खाद देने से पहले मिट्टी परीक्षण कर लें।
निष्कर्ष
2025 में खाद की कीमतों में थोड़ा बदलाव जरूर हुआ है, लेकिन सरकार सब्सिडी के जरिए किसानों पर भार कम रखने की कोशिश कर रही है। जैविक खाद की मांग तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में किसानों को अधिक विकल्प मिलने की संभावना है।